Primary & Senior Prayer

Following Prayer is sung by Primary & Senior Students daily in the assembly.

प्रार्थना

ऊँ सरस्वती महाभागी विद्या कमलं लोचनी,
विश्व रुपे विशालाक्षी विद्यां देही सरस्वती।।
अर्थात
हे भगवती, विद्या देने वाली,
कमल के समान नेत्रों वाली,
विश्व में व्याप्त, विशाल नेत्रों वाली,
कल्याण करने वाली, सरस्वती आपकी जय हो।

मंगलं भगवान् विष्णुः मंगलं गरुड़ध्वजः।
मंगलं पुण्डरीकाक्षः मंगलायतनो हरिः।।
अर्थात
भगवान विष्णु जनके ध्वज पर गरुड़ का चिन्ह है।
जिनकी आँखे कमल सदृश हैं, वे मंगल स्वरुप हैं।

अज्ञान-तिमिरान्धस्य ज्ञानञजन-शलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः।।
अर्थात
मेरा जन्म अज्ञान रुपी अंधकार में हुआ था,
परन्तु गुरु ने ज्ञान-प्रकाश द्वारा मेरे नेत्र को खोल दिया।
मैं उनकी सादर वन्दना करता हूँ।।

हस्तामलकवात्वं श्रीमद्भगवतस्ययः।
दर्शयामास् जीवेभ्यः तं श्रीजीवप्रभुं नमः।।
अर्थात
जिन्होंने श्रीमद्भगवत के सार को जीवों के लिए अति सरल
रुप में प्रस्तुत किया उन श्रीजीव गोस्वामी को हम नमस्कार करते हैं।

हे कृष्ण करुणासिन्धो दीनबन्धो जगत्पते।
गोपेश गोपिकाकान्त राधाकान्त नमोस्तुते।।
अर्थात
हे कृष्णा! हे करुणा के सागर! हे दीनबन्धु। हे संसार के पालक।
हे गोपों के ईश! हे गोपीगण के प्रिय! हे राधाकन्त आपको नमस्कार है।

तप्त-काञचन-गौरंागि राधे वृन्दावनेश्वरी।
वृषभानु-सुते देवि प्रणमामि हरिप्रिये।।
अर्थात
हे तप्त सुवर्ण के समान अगों वाली श्रीमति राधे। हे वृन्दावन की ईश्वरी
हे वृषभानु की पुत्री! हे देवी, श्री कृष्ण की प्रिया, आपको नमस्कार।

नमो महा-वदान्याय कृष्ण-प्रेम-प्रदायिने।
कृष्णाय कृष्ण-चैतन्य-नामिने गौरत्विषे नमः।।
अर्थात
महादानी, श्री कृष्ण स्वरुप चैतन्य नामक
गौरवर्ण वाले भगवान को नमस्कार है।

वाञ छा-कल्प तरुभ्यश्च कृपासिन्धु एव च।
पतितानां पावनेभ्यो वैष्णवेभ्यो नमो नमः।।
अर्थात
जो हमारी इच्छा पूर्ति करने में कल्पतरु के समान है, कृपा के सागर हैं
तथा पतितो को पावन करते हैं ऐसे वैष्णवों को बारम्बार नमस्कार है।

श्रीकृष्ण चैतन्य प्रभुनित्यानदं।
श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौरभक्तवृन्द।
अर्थात
श्रीकृष्ण चैतन्य, हे नित्यानंद प्रभु श्री अद्वैताचार्य, हे पण्डित
गदाधर श्रीवासाचार्य, हे गौरांग भक्तवृन्द महाप्रभु के भक्तगण हम पर कृपा करो।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे हरे।।
अर्थात
हे हरि, हे कृष्ण, हे राम।

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।।
अर्थात
सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, सभी का कल्याण हों,
किसी को कोई दुःख न हों,